Read हमला by अनिल मोहन Online

हमला

देवराज चौहान और मोना चौधरी आमने सामने आ चुके थे। जिस इंसान को बचाने का जिममा देवराज ने लिया था उसके ही अपहरण की सुपारी मोना उठा चुकी थी।फ़कीर बाबा के अनुसार ये पहली बार नहीं था जब इन दो दिगगजों में टकराव हुआ था। पिछले तीन जनमों से इनके बीच टकराव होता आया था और नतीजा केवल एक था। वो था दोनो की मौत। लेकिन इस जनम में इस टकराव का परिणाम कुछ अलग होना था। एक ने मरना था और एक ने जीदेवराज चौहान और मोना चौधरी आमने सामने आ चुके थे। जिस इंसान को बचाने का जिम्मा देवराज ने लिया था उसके ही अपहरण की सुपारी मोना उठा चुकी थी।फ़कीर बाबा के अनुसार ये पहली बार नहीं था जब इन दो दिग्गजों में टकराव हुआ था। पिछले तीन जन्मों से इनके बीच टकराव होता आया था और नतीजा केवल एक था। वो था दोनो की मौत। लेकिन इस जन्म में इस टकराव का परिणाम कुछ अलग होना था। एक ने मरना था और एक ने जीना। उनकी बात में कितनी सच्चाई थी? क्या होगा इस टकराव का नतीजा?कौन होगा अपने मकसद में कामयाब?...

Title : हमला
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ISBN : 9789332419865
Format Type : Paperback
Number of Pages : 320 Pages
Status : Available For Download
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हमला Reviews

  • विकास नैनवाल
    2018-10-03 12:40

    उपन्यास मुझे पसन्द आया। हाँ उपन्यास एकल उपन्यास नहीं है। इसकी कहानी इसके अगले भाग ज़ालिम में समाप्त होती है। मेरी राय ये ही होगी कि अगर आप इस उपन्यास को पढना चाहते हैं तो इसका अगला भाग भी ले लीजियेगा अन्यथा आपको कहानी अधूरी ही लगेगी। उपन्यास के विषय में मैंने अपने ब्लॉग में भी लिखा है। आप चाहे तो निम्न लिंक पर जाकर भी इसे पढ़ सकते हैं :हमला